राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल समेत 7 AAP सांसद भाजपा में शामिल

राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल समेत 7 AAP सांसद भाजपा में शामिल अप्रैल, 25 2026

भारतीय राजनीति में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को एक ऐसा धमाका हुआ जिसने दिल्ली और पंजाब की सियासत की नींव हिला दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए यह किसी डरावने सपने से कम नहीं है, क्योंकि उनके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस सामूहिक पलायन ने न केवल AAP की संसद में ताकत को कम किया है, बल्कि पार्टी की आंतरिक कलह को पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया है।

यह सिर्फ एक दलबदल नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है। अगर आप गौर करें, तो ठीक 7 सांसदों का जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। असल में, भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होते हैं, तो उसे 'स्प्लिट' माना जाता है और सांसदों की सदस्यता नहीं जाती। AAP के पास 10 सदस्य थे, और 7 का आंकड़ा पार करते ही ये सभी सांसद अयोग्य घोषित होने से बच गए। बस, गणित एकदम सटीक बैठ गया!

इन दिग्गजों ने छोड़ा AAP का साथ

इस राजनीतिक उलटफेर में शामिल चेहरों को देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। राघव चड्ढा, पूर्व राज्यसभा नेता, जिन्होंने पंजाब से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, इस नए समूह का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ दिल्ली की चर्चित नेता स्वाति मालीवाल भी हैं, जिन्होंने पिछले काफी समय से पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

इतना ही नहीं, खेल जगत के दिग्गज और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस खेमे में शामिल होकर सबको चौंका दिया है। इनके अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता ने भी भाजपा की सदस्यता ले ली। दिलचस्प बात यह है कि स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी सांसद पंजाब से जुड़े हुए थे, जिससे साफ है कि पंजाब में AAP का किला अब बेहद कमजोर हो चुका है।

कड़वाहट की शुरुआत: जब दरारें गहरी हुईं

अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने बड़े नेता रातों-रात पाला बदल गए? दरअसल, इस कहानी की शुरुआत 13 मई 2024 को हुई थी। उस दिन स्वाति मालीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक करीबी सहयोगी पर उनके निवास स्थान पर शारीरिक हमले का गंभीर आरोप लगाया था। वह घटना पार्टी के भीतर एक गहरे जख्म की तरह थी, जिसे कभी ठीक नहीं किया गया। (सच कहें तो, पार्टी ने इसे दबाने की कोशिश की, पर चिंगारी सुलगती रही।)

तनाव तब और बढ़ गया जब अप्रैल 2026 की शुरुआत में पार्टी नेतृत्व ने राघव चड्ढा को राज्यसभा नेता के पद से हटा दिया। चड्ढा, जो कभी केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते थे, इस फैसले के बाद पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए। यह एक तरह का 'पॉइंट ऑफ नो रिटर्न' था।

'अनियंत्रित भ्रष्टाचार' और गंभीर आरोप

'अनियंत्रित भ्रष्टाचार' और गंभीर आरोप

भाजपा में शामिल होने के बाद स्वाति मालीवाल ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने एक विस्तृत पोस्ट साझा की जिसमें उन्होंने AAP नेतृत्व पर "अनियंत्रित भ्रष्टाचार" का आरोप लगाया। मालीवाल का दावा है कि पार्टी अब उन मूल्यों पर नहीं चल रही है जिनके साथ इसकी शुरुआत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी अब "आपराधिक तत्वों" को बढ़ावा दे रही है और महिलाओं के खिलाफ होने वाले हमलों पर चुप्पी साधे हुए है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम AAP के लिए एक 'मेगा-अर्थक्वेक' है। राज्यसभा में संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह जाना, पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर एक बड़ा प्रहार है। अब संसद के ऊपरी सदन में AAP की आवाज लगभग ना के बराबर रह जाएगी।

आगे की राह और राजनीतिक प्रभाव

आगे की राह और राजनीतिक प्रभाव

इस घटना के बाद अब सबकी नजरें पंजाब और दिल्ली की आने वाली चुनावी हलचलों पर हैं। भाजपा ने एक झटके में न केवल विपक्षी पार्टी को कमजोर किया है, बल्कि पंजाब में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए अनुभवी चेहरों को अपने साथ जोड़ लिया है।

  • संसदीय ताकत: AAP की राज्यसभा संख्या 70% कम हो गई है।
  • पंजाब का समीकरण: पंजाब के 6 सांसदों का जाना वहां की स्थानीय राजनीति को बदल सकता है।
  • छवि पर असर: भ्रष्टाचार विरोधी मंच पर बनी AAP की छवि को अब बड़ा धक्का लगा है।

अब यह देखना होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संकट से कैसे उबरते हैं। क्या वह अपनी बची हुई टीम के साथ दोबारा विश्वास बहाली करेंगे, या यह अंत की शुरुआत है? फिलहाल तो यह साफ है कि राज्यसभा में AAP का पूरी तरह से 'सफाया' हो चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन सांसदों ने एक साथ बीजेपी क्यों ज्वाइन की?

इन सांसदों ने सामूहिक रूप से दलबदल किया ताकि वे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित होने से बच सकें। नियम के मुताबिक, यदि पार्टी के दो-तिहाई सदस्य (इस मामले में 10 में से 7) एक साथ अलग होते हैं, तो इसे वैध विभाजन माना जाता है और उनकी सदस्यता सुरक्षित रहती है।

स्वाति मालीवाल ने AAP नेतृत्व पर क्या आरोप लगाए हैं?

स्वाति मालीवाल ने पार्टी में "अनियंत्रित भ्रष्टाचार" का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी अब आपराधिक तत्वों को बढ़ावा दे रही है और महिलाओं के खिलाफ हिंसा व उत्पीड़न की अनदेखी की जा रही है।

इस दलबदल का पंजाब की राजनीति पर क्या असर होगा?

चूँकि दलबदल करने वाले 7 सांसदों में से 6 पंजाब से संबंधित थे, यह पंजाब में AAP की पकड़ कमजोर करता है। भाजपा को अब पंजाब में अनुभवी राजनेताओं और हरभजन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरों का साथ मिला है, जिससे आगामी चुनावों में समीकरण बदल सकते हैं।

राघव चड्ढा के अलग होने की मुख्य वजह क्या थी?

राघव चड्ढा के अलग होने की तात्कालिक वजह अप्रैल 2026 की शुरुआत में उन्हें राज्यसभा नेता के पद से हटाया जाना था। इसके अलावा, पार्टी नेतृत्व के साथ उनके बढ़ते मतभेद और आंतरिक कलह ने उन्हें भाजपा की ओर जाने पर मजबूर किया।